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सरकार और माओवादियों से अपील
शुक्रवार, नवंबर 6, 2009, 12:02 [IST]

Naxal Gun
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि सरकारी सुरक्षा बलों और सरकार विरोधी माओवादी लड़ाकों से अपील की है कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान वे आम लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखें.

सरकार की ओर से माओवादियों के ख़िलाफ़ प्रस्तावित 'ऑपरेशन ग्रीन हंट' के पहले संस्था ने अपने बयान में कहा है कि स्थानीय लोगों के सामने यह ख़तरा होता है कि वे संघर्ष के बीच फँसकर या तो घायल हो जाएँ, मारे जाएँ या उनका अपहरण कर लिया जाए.संस्था ने सरकार की ओर से बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को माओवादी समर्थक कहे जाने पर भी आपत्ति जताई है.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपने बयान में कहा है कि माओवादी यह दावा करते हैं कि वे समाज के सबसे ग़रीब लोगों के लिए संघर्ष करते हैं, जिसमें आदिवासी, दलित और भूमिहीन किसान शामिल हैं.

दूसरी ओर सरकार कहती है कि विकास के कार्य किए जाने की ज़रुरत है लेकिन माओवादी या नक्सलवादी विकास नहीं करने देते. सरकार अब माओवादियों से अपील कर रही है कि वे संघर्ष विराम कर बातचीत के लिए आगे आएँ.संस्था का कहना है, "इस विवाद में एक बड़ा मसला प्राकृतिक संसाधनों पर कब्ज़े का है, ख़ासकर खनिज भंडारों का है, जो उन राज्यों में बड़ी मात्रा में हैं जहाँ संघर्ष चल रहा है."

मानवाधिकार संस्था ने कहा है कि माओवादी और सरकारों के बीच संघर्ष में आख़िरकार ग़रीब आदमी ही पिसता है.संस्था की वरिष्ठ शोधकर्ता मीनाक्षी गांगुली का कहना है, "माओवादी ग़रीबी दूर करने में सरकार की विफलता और बड़े निर्माण कार्यों से होने वाले नुक़सान का विरोध करने के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं लेकिन वे ख़ुद जिस तरह से प्रताड़ित करने वाले उपायों का सहारा लेते हैं उससे उनके दावों पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है."

दूसरी ओर संस्था ने भारत सरकार के सुरक्षा बलों की ओर से किए जाने वाले दुर्व्यवहार का भी ज़िक्र करते हुए कहा है कि माओवादियों के ख़िलाफ़ पहले की गई कार्रवाइयों में मनमाने ढंग से गिरफ़्तारियों, प्रताड़ना और ग़ैरक़ानूनी हत्याओं के मामले सामने आए थे.

बयान में छत्तीसगढ़ के सलवा जुड़ुम का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि इसकी वजह से लोगों की हत्याएँ हुईं, बलात्कार की घटनाएँ घटीं और दसियों हज़ार लोगों को विस्थापित होना पड़ा. संस्था ने कहा है कि वह 30 अक्तूबर को जारी गृहमंत्री पी चिदंबरम के बयान का समर्थन करते हैं जिसमें उन्होंने सलवा जुड़ुम की निंदा करते हुए कहा था कि सरकार ऐसे किसी ग़ैर सरकारी संगठन का समर्थन नहीं करती जो हथियार लेकर संघर्ष कर रहे हों.

मीनाक्षी गांगुली का कहना है कि सरकार को यह संदेश देना ही होगा कि ऑपरेशन ग्रीन हंट के दौरान मानवाधिकार हनन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पहले जो लोग इसके लिए दोषी रहे हैं उन्हें सज़ा भी दी जाएगी. पश्चिम बंगाल में पुलिस की हिंसा का विरोध कर रहे फ़िल्म निर्माताओं, लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को माओवादी कहे जाने और छत्तीसगढ़ में डॉ विनायक सेन की गिरफ़्तारी का ज़िक्र करते हुए संस्था ने कहा है कि जो लोग मानवाधिकार की बात उठा रहे हैं उन्हें सरकार माओवादियों के आपराधिक सहयोगी की तरह से न चिन्हित करे.



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